प्रदेश के कुछ हिस्सों में सुर्य ग्रहण की घटना नजर आई। रायपुर में बादलों के पीछे छिप सूरज पर ग्रहण उतना साफ नहीं दिखा। लोग छतों पर विशेष चश्मों की मदद से ग्रहण देखने की कोशिश करते दिखे। पुरानी बस्ती स्थित शहर के प्राचीन मंदिरों में ग्रहण के बाद विशेष पूजा करने का प्रावधान है। कई पुरानी मान्यताओं के तहत मंदिरों को बंद रखा गया। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने बताया कि इसे किसी भी तहर के अंध विश्वास से जोड़ना सही नहीं है। सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाने के कारण सूर्यग्रहण होता है।
आंखों का रखें ख्याल
डॉ मिश्र ने बताया कि सूर्य से आने वाली प्रकाश की किरणों के साथ ही अल्ट्रावायलेट, इन्फ्रारेड किरणें भी होती हैं जो आँख के परदे (रेटिना) की कोशिकाओं पर पड़ती हैं। यह आँख के परदे पर बुरा असर डालती हैं। लोगों को धुंधला दिखने की परेशानी हो सकती है। सूर्यग्रहण को रंगीन फिल्म, पानी में, दूरबीन से, धूप के चश्मे से न देखें। ग्रहण को पिन होल कैमरा बनाकर, सोलर फिल्टर युक्त चश्में से देखा जा सकता है।
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