रायपुर विदेश से लौटकर कार से आ रहे थे घर , जैसे ही घर पहुंचे पुलिस घर के सामने खड़ी हो गयी, तत्काल जाना पड़ा अस्पताल
रायपुर. देश के कई
राज्यों में जहां अब तक विदेश से लौटने वालों की सूची नहीं बनी, लेकिन छत्तीसगढ़
में स्थिति उलट है। राजधानी समेत प्रदेश की पुलिस 1 फरवरी से 24 मार्च तक अंतिम
फ्लाइट आने तक विदेश से आने वाले एक-एक यात्री की कुंडली तैयार कर ली है। इस अवधि
में शहर के साढ़े 3 हजार लोग विदेश घूमकर यहां अाए और अब क्वारेंटाइन हो चुके हैं।
इनमें चुपचाप कार से आने वाले भी शामिल हैं। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि पुलिस ने
पहला लॉकडाउन होते ही अपना अलग वॉर रुम बनाया। िवदेश जाने वाले एक-एक यात्री की
सूची बनाई। मोबाइल नंबरों से उनका लोकेशन लिया और सीधे ट्रैक कर लिया। पुलिस इतनी
बारीकी से निगरानी कर रही थी कि टाटीबंध और राजेंद्रनगर के दो यात्री से अपने घर
पहुंचे तो उनके दरवाजे पर पुलिस की टीम एंबुलेंस लेकर तैयार थी। उन्हें गाड़ी में
बिठाकर सीधे एम्स या सरकारी क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया गया।
पुलिस के साथ-साथ
प्रशासनिक अमले ने भी लॉकडाउन के आगे पीछे की कुछ तारीखों में विदेश से आने वालों
की हिस्ट्री निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी। अब तक 1 मार्च से आखिरी फ्लाइट तक
आने वालेे यात्रियों की हिस्ट्री तैयार कर उनकी जांच की गई। अब 1 फरवरी के बाद से
अब तक जितने भी लोग विदेश से लौटे हैं, उनका ब्योरा निकाला जा रहा है। एसएसपी आरिफ
शेख के अनुसार अब तक साढ़े चार हजार मोबाइल नंबरों को खंगाला जा चुका है। एसएसपी के
मुताबिक तकनीकी एक्सपर्ट की पूरी विंग केवल इसी में जुटी है। इसके लिए दो
प्रोबेशनर आईपीएस पारुल अग्रवाल और कल्पना वर्मा को प्रभारी बनाया गया है। वे
थानेदारों से कोआर्डिनेट कर रोज की जानकारी इकट्ठा कर रही हैं। उन्होंने 1 फरवरी
से 28 फरवरी तक विदेश से लौटने वालों का भी ब्योरा निकाल लिया है। मार्च के महीने
में आने वालों की तो जांच करवायी जा चुकी है। अब फरवरी के पहले हफ्ते से लौटने
वालों को निगरानी में लिया जा रहा है।
कई यात्रियों ने छिपायी जानकारी पर प्रशासन ने ले लिया घेरे में
लॉकडाउन के दो दिन बाद यानी 24 मार्च तक राजधानी में फ्लाइट आती रही। इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी तरह तैयार था। विमान से आने वाले यात्री निगरानी में थे। इसके बावजूद कुछ यात्रियों ने एयरपोर्ट पर ये नहीं बताया कि वे विदेश से लौट रहे हैं। पुलिस ने ऐसे यात्रियों के मोबाइल नंबर के आधार पर उनके लोकेशन का पता लगा लिया और उनके घर पहुंचने के पहले ही एंबुलेंस लेकर पहुंच गई। टाटीबंध की एक महिला और राजेंद्रनगर के युवक को तो घर पर बिलकुल एंट्री करने के पहले रोक लिया गया। इसी तरह कई यात्री जो िवदेश से लौटे लेकिन अपने निजी वाहन से रायपुर आए। उन्हें भी मोबाइल लोकेशन के आधार पर ट्रेस कर लिया गया। अपराधिक घटनाएं कम होने के कारण पुलिस का पूरा फोकस शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ बाहर से आने वालों की खोज करना है। अफसरों के अनुसार किसी का मोबाइल नंबर गलत है या पता सही नहीं है, तब भी ऐसे लोगों का पता लगाने में बमुश्किल एक से डेढ़ घंटे ही लग रहे हैं।
लॉकडाउन के दो दिन बाद यानी 24 मार्च तक राजधानी में फ्लाइट आती रही। इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी तरह तैयार था। विमान से आने वाले यात्री निगरानी में थे। इसके बावजूद कुछ यात्रियों ने एयरपोर्ट पर ये नहीं बताया कि वे विदेश से लौट रहे हैं। पुलिस ने ऐसे यात्रियों के मोबाइल नंबर के आधार पर उनके लोकेशन का पता लगा लिया और उनके घर पहुंचने के पहले ही एंबुलेंस लेकर पहुंच गई। टाटीबंध की एक महिला और राजेंद्रनगर के युवक को तो घर पर बिलकुल एंट्री करने के पहले रोक लिया गया। इसी तरह कई यात्री जो िवदेश से लौटे लेकिन अपने निजी वाहन से रायपुर आए। उन्हें भी मोबाइल लोकेशन के आधार पर ट्रेस कर लिया गया। अपराधिक घटनाएं कम होने के कारण पुलिस का पूरा फोकस शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ बाहर से आने वालों की खोज करना है। अफसरों के अनुसार किसी का मोबाइल नंबर गलत है या पता सही नहीं है, तब भी ऐसे लोगों का पता लगाने में बमुश्किल एक से डेढ़ घंटे ही लग रहे हैं।
क्वारेंटाइन वालों के फोन भी निगरानी में
पुलिस के वॉर रुम में घरों में क्वारेंटाइन किए गए लोगों पर
मोबाइल के लोकेशन से निगरानी की जा रही है। वॉर रुम की स्क्रीन पर मोबाइल नंबरों
को अलग-अलग क्रम से नंबर देकर उनका लोकेशन देखा जा रहा है। उनके मोबाइल लोकेशन से
जैसे ही इधर-उधर हो रहे हैं, पुुलिस की टीम वहां पहुंच जा रही है। इससे घर में
क्वारेंटाइन किए जाने वालों को लॉकडाउन का उल्लंघन करने का मौका नहीं मिल रहा है।

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