छत्तीसगढ़ (कांकेर ) : खुद की मानदेय राशि कम होते हुए भी, कांकेर के रसोइया संघ ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए 6.87 लाख.
कांकेर । कहते हैं
दान देने वालों की रकम नहीं दिल देखना चाहिए, जो खुद के बुरे वक्त में भी दूसरों का
भला चाहते हैं। खुद के हालात आर्थिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ को संकट से उबारने
के लिए एकजुटता दिखाई है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कांकेर के रसोइया संघ ने, जिन्होंने
खुद की मानदेय राशि कम होने के बावजूद जरुरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। रसोइयों
का मानदेय इतना कम है कि हम आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस छोटी रकम से घर चलाना कितना
मुश्किल होता होगा लेकिन रसोइया संघ ने आज ये साबित कर दिया कि उनका दिल बहुत बड़ा है।
रसोइया संघ ने बूंद-बूंद से घड़ा भरने की कहावत को संकट के घड़ी में असहायों की मदद
कर साबित कर दिया है और मुख्यमंत्री राहत कोष में 6 लाख 87 हजार रुपये की मदद की है।
रसोइया संघ की सदस्य प्रभा निषाद कहती हैं कि 200 रुपए की मदद करने से हम भूखे नहीं
मर जाएंगे, लेकिन मदद नहीं करेंगे तो जरूर कोई भूखा मर सकता है, जिसे देखते हुए 3 हजार
435 रसाइया संघ ने महामारी से छिड़ी जंग में सहभागिता निभाई है. इस पहल को कांकेर कलेक्टर
केएल चौहान ने भी खूब सराहा है।
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